"मामला देवास निवासी एक युवक से जुड़ा है, जिसके खिलाफ 25 वर्षीय युवती ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने लंबे समय तक विवाह का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।
बचाव पक्ष ने बताया आर्थिक विवाद
"आरोपी की ओर से अग्रिम जमानत याचिका में कहा गया कि दोनों पक्षों के बीच पहले से आर्थिक लेन-देन को लेकर विवाद था। इसी विवाद के चलते पुरानी घटनाओं को आधार बनाकर मामला दर्ज कराया गया। इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने अगस्त 2025 में आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी थी।
स्टेटस को आधार बनाकर मांगी जमानत निरस्ती
"बाद में फरियादी ने कोर्ट में आवेदन देकर जमानत निरस्त करने की मांग की। उसने आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी सोशल मीडिया पर द्विअर्थी शायरी पोस्ट कर उसे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
कोर्ट ने माना - आधार कमजोर
"सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने दलील दी कि संबंधित स्टेटस में कहीं भी पीड़िता का नाम या कोई सीधा संदर्भ नहीं है। इस पर न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने कहा कि बिना किसी स्पष्ट उल्लेख के सोशल मीडिया पोस्ट को जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह साबित नहीं किया गया कि उक्त स्टेटस से पीड़िता या मामले के साक्ष्य प्रभावित हुए हैं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने जमानत निरस्ती का आवेदन खारिज कर दिया और आरोपी को मिली अग्रिम जमानत को बरकरार रखा।
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